चरागाहें नई आबाद होगी
मगर जो बस्तियाँ बर्बाद होगी
ख़ुदा मिट्टी को फिर से हुक्म देगा
कई शक्लें नई ईजाद होगी
अभी मुमकिन नहीं लेकिन ये होगा
किताबें साहिब-ए-औलाद होगी
मैं उन आँखों को पढ़ कर सोचता हूँ
ये नज्में किस तरह से याद होगी
ये परियाँ फिर नहीं आएगी मिलने
ये ग़ज़लें फिर नहीं इरशाद होगी
मैं डरता हूँ अली उन आदतों से
के जो मुझ को तुम्हारे बा'द होगी
— Ali Zaryoun















