मुहब्बत आज़माना चाहता हूँ
मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
ग़ज़ल से दिल लगाना चाहता हूँ
मैं उल्फ़त शाइराना चाहता हूँ
फ़क़त दीदार की ख़्वाहिश नहीं है
गले तुम को लगाना चाहता हूँ
ख़ुदा से माँग कर सब ग़म तुम्हारे
तुम्हें बेग़म बनाना चाहता हूँ
दिलों में आज भी ज़िंदा है 'फ़हमी'
यक़ीं सब को दिलाना चाहता हूँ
— Alok Kumar 'Tabiib'















