मुहब्बत की दुनिया में जब बात होगी
हमारी ग़ज़ल से शुरूआत होगी
अकेले तो मिलने न देगी ये दुनिया
ख़ुदा दरमियाँ होगा तब बात होगी
बिछड़ने पे देखा है लोगों को रोते
कभी हम मिलेंगे तो बरसात होगी
गले मिल के रोएँगे हम तुम सनम जब
हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी
न शरमाओ तुम भी न घबराएँ हम भी
चलो मयकदे में वहीं बात होगी
— Alok Kumar 'Tabiib'















