वो अगर मिल जाए तो क्या कीजिएजल्वा-ए-महबूब देखा कीजिएहो अगर उस से शिकायत भी तो क्याबीती बातों का न शिकवा कीजिएकितने दिन का साथ है किस को पताएक लम्हा भी न ज़ाया कीजिएखींचिए गर फोटो उस के साथ मेंदोस्तों से कुछ न साझा कीजिएगर समझ पाए न वो ख़ामोशियाँक़ुफ़्ल होंठों का तभी वा कीजिए— Alok Kumar 'Tabiib'