समुंदरोंकोउठाएफिरीघटाबरसों
मगरमैंप्यासनअपनीबिछासकाबरसों
बसइतनायादहैतुझसेमिलाथारस्तेमें
फिरअपनेआपसेरहनापड़ाजुदाबरसों
मैंएकउम्रभटकतारहाहूँसहरामें
किमेरीख़ाकउड़ातीरहीहवाबरसों
हमीनेदामन-ए-शबकोनहाथसेछोड़ा
सहरकेगीतसुनातीरहीसबाबरसों
नसीमशाख़-ए-गुल-ए-तरसेक्यूँँउलझतीहै
चमनमेंफूलअगरफिरनखिलसकाबरसों
तुम्हींनेराह-ए-वफ़ापरक़दमरखानकभी
चराग़बनकेमैंहरमोड़परजलाबरसों
किरनकिरनमुझेपरवाज़कीनवेदहैआज
रहाहूँतेरीफ़ज़ाओंमेंपर-कुशाबरसों