maaya sar | माया सर

  - Aman Mishra 'Anant'

माया सर
यूँ को पार आया हूँ
राम मैं तेरे द्वार आया हूँ

अपना क़िस्सा भी कर्ण जैसा है
साँस वचनों पे वार आया हूँ

माँ की ममता का मान रखना था
अपनी राधा बिसार आया हूँ

पात्र बनके किसी कथा का मैं
अपनी गाथा को मार आया हूँ

आया हूँ पहली बार ही लेकिन
लगता है कितनी बार आया हूँ

जीत जिसको प्रिये बुरा होता
ऐसी बाज़ी को हार आया हूँ

कोई क्यूँँ पूछता नहीं मुझ सेे
किस लिए तेज़ धार आया हूँ

  - Aman Mishra 'Anant'

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