mire hazaar ghamon ka hisaab kaun likhe | मिरे हज़ार ग़मों का हिसाब कौन लिखे

  - Amatul Hai Wafa

मिरे हज़ार ग़मों का हिसाब कौन लिखे
मैं इक कहानी हूँ मुझ पर किताब कौन लिखे

गुनाह लिखते रहे मेरी आह को लेकिन
जो अश्क दिल में हैं उन को सवाब कौन लिखे

तुम्हारी याद नहीं इक अज़ाब है गोया
मगर तुम्हारे करम को अज़ाब कौन लिखे

हम अपने ज़ख़्म-ए-जिगर को छुपाए बैठे हैं
तुम्हारे चेहरे को ताज़ा गुलाब कौन लिखे

मिरा क़लम तो मिरा साथ छोड़ बैठा है
किताब-ए-दिल का मिरी इंतिसाब कौन लिखे

सभी को प्यारी है जाँ अपनी एक मेरे सिवा
सितम सितम को तुम्हारे जनाब कौन लिखे

मैं अपने ख़त भी ख़ुद उन की तरफ़ से लिखती हूँ
वफ़ा को छोड़िए उस का जवाब कौन लिखे

  - Amatul Hai Wafa

Khat Shayari

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