तुम जैसी हो
बस मेरी हो
समझी ना तुम
बस मेरी हो
यूँ समझो तुम
जीवन ही हो
तुम ही दिल हो
धड़कन भी हो
सपना हो या
पास खड़ी हो
इतनी प्यारी
क्यूँ लगती हो
प्यार है मुझ से
क्या कहती हो
फिर से सुन लो
बस मेरी हो
— Ambar
बस मेरी हो
समझी ना तुम
बस मेरी हो
यूँ समझो तुम
जीवन ही हो
तुम ही दिल हो
धड़कन भी हो
सपना हो या
पास खड़ी हो
इतनी प्यारी
क्यूँ लगती हो
प्यार है मुझ से
क्या कहती हो
फिर से सुन लो
बस मेरी हो
Other ghazal from the same pen
Shers of haseen.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling