
रस्ते से मुड़ जाया कर
रोज़ न मिलने आया कर
पिज़्ज़ा बरगर खा ले पर
जानम भाव न खाया कर
मेरे लिए इतना ही कर
याद हमेशा आया कर
धूप में बन के बादल तू
राहत वाली छाया कर
तन्हाई में जब तुझ को
सोचूँ तू आ जाया कर
— Ambar
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