Rehaan
Rehaan
Ghazal

फिर दो दिलों में अहद को ले कर लड़ाई हो गई

फिर बैठे-बैठे हिज्र की अच्छी कमाई हो गई

हम बे-ख़ुदी में रात भर किस सेज पर सोए रहें
हम को गिला है हम से शायद बे-वफ़ाई हो गई

इक हम थे जो मंडप से अपनी उठ गए थे बीच में
और उस ने सीधा कह दिया अब तो सगाई हो गई

इस इश्क़ के शतरंज में राजा भी मैं रानी भी मैं
फिर हुस्न की सीरत से आज इस पर लड़ाई हो गई

जिस को ख़ुदा से माँगने में उम्र सारी कट गई
वो ख़ुश-बदन पल भर में ही हम से पराई हो गई

हम चूड़ियाँ लाने गए थे शहर से उस के लिए
वापस जब आए तो सुना उस की विदाई हो गई

कमरा मेरा कुछ देर पहले था बहुत बिखरा हुआ
कुछ फूल फेंके ख़त जलाएँ और सफ़ाई हो गई

रेहान उस ने हाथ रक्खा कल मेरे सीने पे तो
ऐसा लगा पिंजरे से पंछी की रिहाई हो गई

— Rehaan

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