जिन महफ़िलों में तू हो कोई और क्या चर्चा करे
जो सामने हो तू अगर कैसे कोई पर्दा करे
तुझ
में हुनर तुझ
में हया तू है हसीं तू है ख़ुदा
दिल पर बड़ी आफ़त कि ये किस बात पे झगड़ा करे
हम दोपहर की धूप में गुमराह तेरे शहर में
कह दे किसी शजरे से तू हम पर ज़रा साया करे
छुप कर मिले बातें करे ता'ने सुने रुस्वा भी हो
इक अजनबी के वास्ते लड़की भला क्या-क्या करे
अख़बार के इस दौर में किस को सुनाएँ हाल-ए-दिल
हर कोई बद-गो है यहाँ हर कोई हंगामा करे
तू वो ग़ज़ल जिस के सभी अश'आर हम से बे-ख़बर
और दिल हमारा नज़्म ये हर पल तुझे गाया करे
तुझ को मुबारक हो यही तो चाहतें थीं कल तेरी
दिल रात भर रोया करे दिल रात भर तड़पा करे
ये है दुआ 'रेहान' की रब से तुझे बेटा मिले
वो भी किसी की दीद को यूँ रात-दिन तरसा करे















