Rehaan
Rehaan
Ghazal

जिन महफ़िलों में तू हो कोई और क्या चर्चा करे

जो सामने हो तू अगर कैसे कोई पर्दा करे

तुझ
में हुनर तुझ
में हया तू है हसीं तू है ख़ुदा
दिल पर बड़ी आफ़त कि ये किस बात पे झगड़ा करे

हम दोपहर की धूप में गुमराह तेरे शहर में
कह दे किसी शजरे से तू हम पर ज़रा साया करे

छुप कर मिले बातें करे ता'ने सुने रुस्वा भी हो
इक अजनबी के वास्ते लड़की भला क्या-क्या करे

अख़बार के इस दौर में किस को सुनाएँ हाल-ए-दिल
हर कोई बद-गो है यहाँ हर कोई हंगामा करे

तू वो ग़ज़ल जिस के सभी अश'आर हम से बे-ख़बर
और दिल हमारा नज़्म ये हर पल तुझे गाया करे

तुझ को मुबारक हो यही तो चाहतें थीं कल तेरी
दिल रात भर रोया करे दिल रात भर तड़पा करे

ये है दुआ 'रेहान' की रब से तुझे बेटा मिले
वो भी किसी की दीद को यूँ रात-दिन तरसा करे

— Rehaan

More by Rehaan

Other ghazal from the same pen

See all from Rehaan →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling