कभी त्योहारों का बनके कोई हफ़्ता चली आनासफ़र हो ख़त्म तुमपे बनके वो रस्ता चली आनाकई बरसों से हूँ मैं चाहता लिखना ग़ज़ल ख़ुद पेसनम करने मुकम्मल बनके तुम मक़्ता चली आना— Rehaan