तेरी ही धड़कनों को दिल में जाँ बाशिन्दा रक्खा हैबनाया था तेरा जो अक्स वो ताबिन्दा रक्खा हैये ग़म तुझ से बिछड़ने का किसी मातम सा लगता हैमगर ये ग़म ही है जिस ने कि अब तक ज़िन्दा रक्खा है— Rehaan