baaton men bachpan ka jab kissa aaya | बातों में बचपन का जब किस्सा आया

  - Anand Verma

बातों में बचपन का जब किस्सा आया
पत्थर जैसे दिल को भी रोना आया

पहली बार जो उसकी आँखों में देखा
उसको ढूंढा और मुझे भटका आया

खूब थे पैसे जब गिनना नइ आता था
कम ही लगते है जबसे गिनना आया

घूम घूम कर दुनिया देखी जिसने भी
हार गया तो अपने घर सीधा आया

सारी 'उम्र करी जिस चेहरे से नफ़रत
मरते मरते याद वही चेहरा आया

रोते रोते साल गुज़ारे जो हमनें
बाद में उनपर हमको ही हँसना आया

पहले हम बस मरते मरते जीते थे
मरना सीखा तब जाकर जीना आया

  - Anand Verma

DP Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Anand Verma

As you were reading Shayari by Anand Verma

Similar Writers

our suggestion based on Anand Verma

Similar Moods

As you were reading DP Shayari Shayari