कि जब घर में नया पंखा लगेगा
हर इक रस्सी को तब सदमा लगेगा
फ़कीरी ओढ़ कर निकलेंगे इक दिन
हर इक सहरा हमें दरिया लगेगा
तुम उस सेे बात करलो वक़्त रहते
वगरना फ़ैसला धोका लगेगा
जो उसने छत पर ज़ुल्फ़े खोल ली है
सड़क पर देखना, मेला लगेगा
तुम्हें बातों में उलझाकर, जबीं पर
अगर मैं चूम लूँ, कैसा लगेगा?
ये शाने आपकी ख़ातिर खुले है
पता था आपको कन्धा लगेगा
मिलेंगे जब, चिकोटी काट देना
वगरना वस्ल इक सपना लगेगा
ये दिल टूटा है अब के आख़री बार
मरम्मत में इसे अरसा लगेगा
मुझे कस के पकड़ कर बैठ जाओ
इधर आगे तुम्हें धचका लगेगा
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