ki jab ghar men naya pankha lagega | कि जब घर में नया पंखा लगेगा

  - Anand Verma

कि जब घर में नया पंखा लगेगा
हर इक रस्सी को तब सदमा लगेगा

फ़कीरी ओढ़ कर निकलेंगे इक दिन
हर इक सहरा हमें दरिया लगेगा

तुम उस सेे बात करलो वक़्त रहते
वगरना फ़ैसला धोका लगेगा

जो उसने छत पर ज़ुल्फ़े खोल ली है
सड़क पर देखना, मेला लगेगा

तुम्हें बातों में उलझाकर, जबीं पर
अगर मैं चूम लूँ, कैसा लगेगा?

ये शाने आपकी ख़ातिर खुले है
पता था आपको कन्धा लगेगा

मिलेंगे जब, चिकोटी काट देना
वगरना वस्ल इक सपना लगेगा

ये दिल टूटा है अब के आख़री बार
मरम्मत में इसे अरसा लगेगा

मुझे कस के पकड़ कर बैठ जाओ
इधर आगे तुम्हें धचका लगेगा

  - Anand Verma

Nigaah Shayari

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