itni maara maari hai | इतनी मारा मारी है

  - Anand Verma

इतनी मारा मारी है
तेरी क्या तैयारी है?

दुनिया के हर ग़म में अपनी
थोडी हिस्सेदारी है

मौत कोई अनजान नहीं है
अपनी रिश्तेदारी है

जिस्म भले ये मेरा है
लेकिन जान तुम्हारी है

एक सपेरा ये बोला
अपनी साँप से यारी है
'इश्क़ दुबारा करना है
पर हालत बेचारी है

माँ ने रोटी देकर मुझको
भूखे रात गुज़ारी है

फूल तुम्हारे, तुम रख लो
पास हमारे क्यारी है

मुझको ज़िंदा रखने की
तेरी ज़िम्मेदारी है

  - Anand Verma

Love Shayari

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