मुहब्बत में हुआ आबाद कोई

मुहब्बत में हुआ बर्बाद कोई

मैं जिस की बाँह में जी भर के रोता
ना पहले था ना होगा बा'द कोई

रिहा करदो परिंदों को फिज़ा में
कि अब बाहर नहीं सय्याद कोई

मैं वापस हूँ खड़ा पैरों पे अपने
करो अब ठीक से बर्बाद कोई

मेरा हर शे'र केवल हिज़ पर है
मिला मुझ को नहीं उस्ताद कोई

किया तुम को था जैसे याद मैं ने
कभी करता मुझे भी याद कोई

मैं दुनिया घूम कर वापस हूँ आया
मिला मुझ सेा नहीं बर्बाद कोई

सितारे क़ैद है सब आसमाँ में
ज़रा उन को करो आज़ाद कोई

— Anand Verma

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