मुहब्बत में हुआ आबाद कोई
मुहब्बत में हुआ बर्बाद कोई
मैं जिसकी बाँह में जी भर के रोता
ना पहले था ना होगा बाद कोई
रिहा करदो परिंदों को फिज़ा में
कि अब बाहर नहीं सय्याद कोई
मैं वापस हूँ खड़ा पैरों पे अपने
करो अब ठीक से बर्बाद कोई
मेरा हर शे'र केवल हिज़ पर है
मिला मुझको नहीं उस्ताद कोई
किया तुमको था जैसे याद मैंने
कभी करता मुझे भी याद कोई
मैं दुनिया घूम कर वापस हूँ आया
मिला मुझ सेा नहीं बर्बाद कोई
सितारे कैद है सब आसमाँ में
ज़रा उनको करो आज़ाद कोई
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