महफ़िल सजी हुई थी सुनसान कर गए वोगुलज़ार दिल को मेरे शमशान कर गए वोदिल में मुझे बसा कर अपना बना लिया थाफिर क्या हुआ न जाने अंजान कर गए वो— Aniket sagar