जिस तरह हो गए जंगल ख़ामोशहो रही हूँ मैं मुसलसल ख़ामोशमुझ में बाक़ी नहीं चिंगारी भीआग होनी ही थी जल जल ख़ामोशख़ास वक़्तों में छलक जाती हूँ मैंदरिया रहता नहीं हर पल ख़ामोशऔर ताख़ीर न कर आने मेंहो न जाऊँ मैं मुकम्मल ख़ामोशकौन आख़िर तुझे समझाए 'सहर'ऐसे रोते नहीं, पागल, ख़ामोश— Anjali Sahar