jab uski hi agar marzi nahin hai | जब उसकी ही अगर मर्ज़ी नहीं है

  - Ankit Maurya

जब उसकी ही अगर मर्ज़ी नहीं है
किसी की फिर यहाँ चलती नहीं है

यहाँ पे मौत भी सस्ती नहीं है
पियाला है मगर व्हिस्की नहीं है

ये समझें देख कर दुनिया के ग़म को
हमारा ग़म अभी कुछ भी नहीं है

मोहब्बत क्लास है जिस
में कभी भी
ख़याल-ए-यार से छुट्टी नहीं है

हमारे पास लेे के आइए दिल
हमारी हुस्न से बनती नहीं है

सदा तो दूर नइ है रौशनी भी
दर-ए-ज़िंदान है खिड़की नहीं है

नहीं मुमकिन यहाँ पे ख़ुदकुशी भी
है पंखा तो मगर रस्सी नहीं है

  - Ankit Maurya

Udasi Shayari

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