जब उसकी ही अगर मर्ज़ी नहीं है
किसी की फिर यहाँ चलती नहीं है
यहाँ पे मौत भी सस्ती नहीं है
पियाला है मगर व्हिस्की नहीं है
ये समझें देख कर दुनिया के ग़म को
हमारा ग़म अभी कुछ भी नहीं है
मोहब्बत क्लास है जिस
में कभी भी
ख़याल-ए-यार से छुट्टी नहीं है
हमारे पास लेे के आइए दिल
हमारी हुस्न से बनती नहीं है
सदा तो दूर नइ है रौशनी भी
दर-ए-ज़िंदान है खिड़की नहीं है
नहीं मुमकिन यहाँ पे ख़ुदकुशी भी
है पंखा तो मगर रस्सी नहीं है
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