rabt ko aise rusva mat kar | रब्त को ऐसे रुस्वा मत कर

  - Ankit Maurya

रब्त को ऐसे रुस्वा मत कर
ग़ुस्सा कर ले झगड़ा मत कर

हाथ पकड़ ले पागल मेरा
मर जाऊंगा तन्हा मत कर

उसकी पलकें झुक जाती हैं
उसको ऐसे देखा मत कर

पेशानी पे बल आएंगे
इतना भी तू सोचा मत कर

तुझको मुझसे प्यार हुआ है.?
रोक ले ख़ुद को ऐसा मत कर

अगर बनाया तो काम में ला
मुझको यूँँ हीं ज़ाया' मत कर

मैं था वो थी रात हसीं थी
इसके आगे पूछा मत कर

  - Ankit Maurya

Pagal Shayari

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