वो दोस्त बनेंगे न कभी यार बनेंगेजो लोग मुख़ालिफ़ के तरफ़दार बनेंगेदस्तार जो ख़ुद रखते हैं क़दमों में किसी केमैं कैसे समझ लूँ कि वो सरदार बनेंगे— Ansar Etavi