तेरा मेआ'र तो अपनी जगह है

मगर बीमार तो अपनी जगह है

बहुत कुछ लुट चुका है इस जहाँ से
अभी बाज़ार तो अपनी जगह है

हर इक सूरत की रा'नाई है मद्धम
वो इक रुख़्सार तो अपनी जगह है

किसे रस्मों रिवाजों से तअल्लुक़
यहाँ दरकार तो अपनी जगह है

जिसे चाहे सज़ा का हुक़्म कर दे
तेरी सरकार तो अपनी जगह है

मोहब्बत में किफ़ायत किश्त क़र्ज़ा
ये कारोबार तो अपनी जगह है

हटाकर आज तस्वीरों को देखा
दर-ओ-दीवार तो अपनी जगह है

— Anshika Shukla

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