Anshika Shukla

Anshika Shukla

@anshika15072002

Anshika Shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anshika Shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

आँसुओं की चाहत से ज़िंदगी सजाई है ख़ाकसार होकर भी ख़ाक ही उड़ाई है — Anshika Shukla
ज़िंदगी हमक़दम रही लेकिन वक़्त से हमक़दम नहीं होती — Anshika Shukla
बहार के दिन हैं ये पुराने तुम्हें पता है हमें पता है ये सारे तोहमत के हैं फ़साने तुम्हें पता है हमें पता है — Anshika Shukla
हवाओं ने नमकीन आँसू छुए हैं इसी से मिरे ज़ख़्म भर जा रहे हैं — Anshika Shukla
परिंदे भी मुड़कर नहीं आएँगे क्या दरख़्तों के दिन अब गुज़र जा रहे हैं — Anshika Shukla
तू सिर्फ़ कह रहा है हम कभी मिलेंगे नहीं ज़बान दे रहा है तो नज़र उठा कर दे — Anshika Shukla
आप के सिम्त से जाने की तमन्ना तो नहीं फ़िक्र मत करिए चले जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता — Anshika Shukla
इश्क़ वहशत कैफ़ियत और कुछ किताबें बस इन्हीं से ज़िंदगानी चल रही है — Anshika Shukla
चाँद जुगनू से लड़ रहा है क्यूँ चाँद में ख़ुद की रौशनी है क्या — Anshika Shukla
वो जिस हमदर्द को आँसू मिरे अश'आर लगते थे उसी बे-दर्द को मेरी हँसी अच्छी नहीं लगती — Anshika Shukla
तसल्ली ठिकानों पे मिलती नहीं है बहुत हार के आज घर जा रहे हैं — Anshika Shukla
हर इक शाम अपनी हदें तोड़कर के ये दोनों किनारे किधर जा रहे हैं — Anshika Shukla
कहीं इंसान ही पत्थर कहीं पत्थर की मूरत है कभी घर से निकलते हैं तो जादू देख लेते हैं — Anshika Shukla
तू सिर्फ़ कह रहा है हम कभी मिलेंगे नहीं ज़बान दे रहा है तो नज़र उठा कर दे — Anshika Shukla

Ghazal

हवाओं के नग़् में जिधर जा रहे हैं वहीं के मुसाफ़िर ठहर जा रहे हैं तसल्ली ठिकानों पे मिलती नहीं है बहुत हार के आज घर जा रहे हैं तमाशा तमाशे से बढ़कर हुआ है यहाँ हो के सब बे-ख़बर जा रहे हैं जिन्हें आज़माने का फ़न आ गया था वो ख़ुद हो के मद्देनज़र जा रहे हैं उन्हें तो कोई जानता ही नहीं था वो क्या देखने डाकघर जा रहे हैं परिंदे भी मुड़कर नहीं आएँगे क्या दरख़्तों के दिन अब गुज़र जा रहे हैं किसी एक मौसम ने छीना है सब कुछ सो हम ये समाँ छोड़कर जा रहे हैं हवाओं ने नमकीन आँसू छुए हैं इसी से मिरे ज़ख़्म भर जा रहे हैं हर इक शाम अपनी हदें तोड़कर के ये दोनों किनारे किधर जा रहे हैं — Anshika Shukla

Nazm

"ख़ाली आँखें" नहीं ख़ाली नहीं रह सकती हैं आँखें अकेलापन डराता है उन्हें कभी बहुत सुकून से भरी होंगी फिर उस के अलविदा कहते ही ख़्वाब आ जाएँगे उन की जगह लेने जो पूरे हुए तो मुस्कुराहटें भर देंगे आँखों में वर्ना आँसुओं के ज़र्रे छीन लेंगे वो जगह और आँसुओं के गुज़र जाने पर भी मिलेगी तुम्हें गहन ख़ामोशी जो भरी होगी आँखों के कोनों में जिस के चले जाने के बा'द फिर देखोगे तुम एक नई सुब्ह की चमक उन में तो आज मेरे कहने पर आईना देखना या देख लेना किसी और की आँखों में ही ये जानने के लिए कि क्या है तुम्हारी आँखों में जिस सेे पता चले तुम्हें भी कि ख़ाली नहीं रह सकती हैं आँखें — Anshika Shukla