इतना लुटे कि हिज्र मनाया नहीं गयाहम से कभी पलट के बुलाया नहीं गयाआँखों से आरज़ू तो गई ख़्वाब भी गएतेरा तो एक वार भी ज़ाया' नहीं गया— Anshika Shukla