कोई मंदिर नहीं होगा तो मस्जिद लौट जाएँगे
हमारे हाल सुन लेंगे तो वाजिद लौट जाएँगे
किसी पंछी को दे देना सवालों का पिटारा तुम
अगर वो ला नहीं पाया तो मुंशिद लौट जाएँगे
हमें तुम क्यूँ कोई रस्ता दिखाने आ गए हो याँ
अगर पूछा जो रस्ता घर का मुर्शिद लौट जाएँगे
ये तुम हर घर गली-कस्बे में बातें ख़ूब ढोते हो
बिठा दें गर अदालत में ये शाहिद लौट जाएँगे
उदासी मेरी इस कारण से कोई ख़त नहीं लिखती
तुम्हारा नाम ऊपर देख क़ासिद लौट जाएँगे
— Anubhav Gurjar















