हुस्न के दम पे हो चाहे पर बड़ी बेबाक हो तुममैं बड़े अफ़सोस में हूँ साथ में ही ख़ाक हो तुमयूँ अज़िय्यत में मुझे तुम छोड़ कर जा तो रही होजिस्म के भूखों को जानो इतनी भी चालाक हो तुम— Anubhav Gurjar