तुम नहीं हो फिर भी झूठा फ़ालतू ग़म कर रखा है
इतनी सी हो और तुम ने नाक में दम कर रखा है
मैं भटकता सा बिलखता सा तड़पता फिर रहा था
तुम मिली हो तब से तुम ने दिल मिरा सम कर रखा है
गर कहीं बातों ही बातों में बुरा कुछ लग न जाए
सोच कर मैं ने ये तुम से बोलना कम कर रखा है
मतलबी ज़ालिम जगत के सब उसूलों को मिटा कर
मैं ने कब ये कर दिया तुम-ओ-मैं को हम कर रखा है
जानता हूँ कह न पाऊँगा कभी मैं हाल दिल का
आज लेकिन शा'इरी में आँख को नम कर रखा है
— Anubhav Gurjar















