दिल ही दिल में न बातें बनाया करो
सामने जब हो तो कुछ बताया करो
अपनी मस्ती में बस्ती बसाया करो
जो जले दिल किसी का जलाया करो
ख़ल्वतों में है जीने की बस ये अदा
आइना देख कर मुस्कुराया करो
बात करने का है बस सलीक़ा यही
एक सुन कर के दूजी सुनाया करो
— anupam shah















