तुम्हारी नज़र का सितारा हुआ
मैं कुछ इस तरह से तुम्हारा हुआ
जो पकड़ा था दामन तुम्हारा कभी
ख़ुदा का मुझे कुछ इशारा हुआ
मिरे हाथ में तेरा चेहरा सनम
वो क़िस्सा न फिर जो दुबारा हुआ
मुझे इश्क़ का फ़न सिखाया गया
मैं तड़पा बहुत जब किनारा हुआ
यूँ फिरता हूँ अब बे-सबब गुमशुदा
मुहब्बत में लूटा सा मारा हुआ
— anupam shah















