कभी मुझ सेे रूठा कभी बात की
यही हद रही उस के ज़ुल्मात की
गले से वो आ कर के लग जाएगा
करेगा वो बातें बिना बात की
न तो हाथ पकड़ा न नज़रें मिलीं
ये किस तरह की फिर मुलाक़ात की
— anupam shah
यही हद रही उस के ज़ुल्मात की
गले से वो आ कर के लग जाएगा
करेगा वो बातें बिना बात की
न तो हाथ पकड़ा न नज़रें मिलीं
ये किस तरह की फिर मुलाक़ात की
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