hazaaron koshishon ke baad ham mazboor hone hainna jaane zaKHm kitne aur ab naasoor hone hain | हज़ारों कोशिशों के बाद हम मज़बूर होने हैं

  - anupam shah

हज़ारों कोशिशों के बाद हम मज़बूर होने हैं
न जाने ज़ख़्म कितने और अब नासूर होने हैं

तुम्हारे नाम का तो ज़िक्र थोड़ा सा हुआ है बस
हमारे और भी क़िस्से अभी मशहूर होने हैं

ज़रा सी उलझनों में छोड़ देते हो जो तुम राहें
अभी तो मंज़िलों तक इम्तिहाँ भरपूर होने हैं

मेरे हालात भी अक्सर ये मुझ सेे पूछ लेते हैं
तेरी तक़दीर के दिन कब तुझे मंज़ूर होने हैं

तुम्हारे बाद से घर में उजाला भी नहीं आया
अँधेरे बस तुम्हारे नूर से ही दूर होने हैं

बदल जाएँगे चेहरे पर नहीं बदलेगी ये फितरत
ये कच्चे आम थोड़े वक़्त में अमचूर होने हैं

  - anupam shah

Qismat Shayari

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