जो मौसम हमें रास आते हैं
जल्दी से क्यूँ बदल जाते हैं
तब ही हार जाता है दुश्मन
हम जब जब मुस्कुराते हैं
वो है पुराने गाने कि धुन
हर शाम उसे गुनगुनाते हैं
रिश्ते निभाते कहाँ हैं लोग
लोग सिर्फ़ रिश्ते बनाते हैं
जहाँ लगी थी तस्वीर हमारी
नयन वहीं पर ठहर जाते हैं
— Anurag Ravi















