KHud se ye bala taltee hi kahaan mire sar se | ख़ुद से ये बला टलती ही कहाँ मिरे सर से

  - Nishant Singh

ख़ुद से ये बला टलती ही कहाँ मिरे सर से
होता है नहीं तर्क-ए-''इश्क़ बोलने भर से

जो दिलासे के ख़ातिर ही जगह जगह बिखरा
दिल वो क्यूँ ही चाहेगा कोई फिर घटा बरसे

देख ये ख़लल फिर डालेगी मेरी ख़ल्वत में
आ रही हवा ये जो तेरे जिस्म के दर से

इस सेे पहले राएगाँ था हर एक घर में जो
फूल हो गया बाहर आके आपके घर से

आइना दिखाने पर हाल हो गया ऐसा
कोई कुछ नहीं कहता सच को कहने के डर से

  - Nishant Singh

Ghar Shayari

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