"छोटी सी मुलाक़ात"
हम बचपन में खेलते हुए यूँ जवाँ हो गए
अरमाँ बिना कहे ही सब बयाँ हो गए
बचपन में खेलते थे जो छुपने का खेल हम
चाहते थे न ढूँढ़ पाए कोई छुपते थे ऐसे हम
एक दिन पता चला कि हारा नहीं है कोई
ढूँढा तो एक ने था पकड़े गए थे हम
साँसें तो छू रही थी चुप चुप खड़े थे हम
माना कि धड़कनों को रोके रहे थे हम
दिल ने न मानी बात पसीने से नहा गए
धड़कन थी इतनी तेज़ डरने लगे थे हम
ऐसी मुलाक़ात कभी महसूस न की थी
दोनों ने कभी ऐसी कोई बात न की थी
ख़फ़ा हूँ ज़िन्दगी से वो वक़्त बीत क्यूँ गया
उस के गुज़र जाने की कोई बात न की थी
उस के गुज़र जाने की कोई बात न की थी
— arjun chamoli















