तुम आश्ना हो क्या
तकरार गर भुलाई हो तो मुझे बता
मेरी तरह अभी तक तुम आश्ना हो क्या
यादों में हर जगह है मिलते जहाँ थे हम
मुझ को नहीं पता था होगा कभी ये कम
मंज़िल नहीं मिली थी कोशिश किए थे हम
दो गाम ही चले थे फिर मुड़ गए थे हम
वा'दा करो मोहब्बत में खा के ये क़सम
हम साथ होंगे उन के जिन को कहें सनम
अब हम कभी न बिछड़ें खाते हैं ये क़सम
जानाँ नए सिरे से पूरी करें क़सम
तुम गर जवाब दोगे आता हूँ मैं वहाँ
सोचो ज़रा अभी तक तुम आश्ना हो क्या
सोचो ज़रा अभी तक तुम आश्ना हो क्या
— arjun chamoli















