जीने के सारे ढँग हमारे बदल गए
वह क्या मिले कि अपने सितारे बदल गए
लौ थरथरा के जैसे दिए की ख़मोश हो
कुछ इस तरह वह कर के इशारे बदल गए
हमने तो सब से हाथ मिलाए थे बज़्म में
क्या जाने किस से हाथ हमारे बदल गए?
गर्दिश में आ गए जो मेरे पाँव दोस्तों
अहबाब बदले दोस्त भी सारे बदल गए
इस दौर का सियासी फ़साना न पूछिये
साँपों को छोड़ सारे पिटारे बदल गए
फटने लगी जमीन कहीं फट गए पहाड़
फेरी नज़र ख़ुदा ने नज़ारे बदल गए
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