nazar men khwaab kisi ka suhaana aata hai | नज़र में ख़्वाब किसी का सुहाना आता है

  - A R Sahil "Aleeg"

नज़र में ख़्वाब किसी का सुहाना आता है
हर एक बात पे उस को बहाना आता है

छुपा रहा हूँ मैं हर ग़म छुपाना आता है
कोई हो हाल मुझे मुस्कुराना आता है

सभी के वास्ते मुमकिन नहीं है 'इश्क़ में यह
वो दिल जलाए जिसे दिल जलाना आता है

अजीब खेल है क़िस्मत का देखिए तो सही
वो रो रहा है जिसे मुस्कुराना आता है

अमीर लोगों पे कुछ तो ख़ुदा की है रहमत
किसी के हाथ यूँँ ही कब ख़ज़ाना आता है

बताओ कैसे करूँँ तुम से चैन की उम्मीद
तुम्हें तो सिर्फ़ मेरा दिल दुखाना आता है

हमारे बीच ज़माने का जब नहीं है दख़्ल
हमारे बीच भला क्यूँ ज़माना आता है

मुझे भुलाने की जिद है तो ठीक है 'साहिल'
भुलाने वाले तुझे कुछ भुलाना आता है

  - A R Sahil "Aleeg"

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