इश्क़ का ग़म और उस पर बेवफ़ाई का भी ला-महदूद सदमा अब कहें क्याउम्र है बस तीस की लेकिन दिखाई देता है जैसे हो नब्बे का कुहन-साल— A R Sahil "Aleeg"