सबसे बेगाना बनाया आपने
जी ज़रीफ़ाना बनाया आपने
फ़ितरतन रखता था वारफ़्ता मिज़ाज
दिल फ़क़ीहाना बनाया आपने
सारी जिद्द-ओ-जहद सारी 'इश्क़ियात
सब को अफ़साना बनाया आपने
आप की यादें छुपाए सर कहाँ
घर को वीराना बनाया आपने
बन्दिशों के दाइरा में मयकशी
क्यूँ ये पैमाना बनाया आपने
कौन काफ़िर कौन है ईमाँ-परस्त
फ़र्क मौलाना बनाया आपने
अब ज़माने की न ख़ुद की है ख़बर
अच्छा दीवाना बनाया आपने
ग़म से था ना-आश्ना दिल क़ब्ल-ए-इश्क़
ग़म का काशाना बनाया आपने
मिलता 'साहिल' वस्ल होता ऐन-ओ-क़ाफ़
क्यूँ जुदा-गाना बनाया आपने
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