मुआफी माँ ने माँगी इश्क़ में की बे-वफ़ाई जो ग़ज़ाला नेसवाली माँ थी करता क्या मुआ'फ़ी दे दी हम ने भी ग़ज़ाला को— A R Sahil "Aleeg"