हिम्मत ये तोड़ने को बराबर लगी हुई
बीमारी तेरे इश्क़ की है सर लगी हुई
दीवार देख कर भी निशानी नहीं मिली
है एक ऐसी कील जो भीतर लगी हुई
या आँख फोड़ दो या तो मंज़र बदल दो अब
जंगल की आग सीने से डटकर लगी हुई
मैदान से ये ख़्वाब भी पीछे नहीं हटे
और नींद भी है ऐसी बराबर लगी हुई
पहले तो माँगने पे कहीं छत नहीं मिली
चादर भी मिल सकी जो तो काकर लगी हुई
दिल खोल कर 'अशांत' मना जीत की ख़ुशी
इस जीत में अमान की पावर लगी हुई
— Prabhat Adhar















