तसव्वुर या हक़ीक़त है चलो देखें
ये आँखें हैं ग़नीमत है चलो देखें
तमाशा है मुशाहिद हैं मगर फिर भी
हमारी क्या ज़रूरत है चलो देखें
हैं वाइज़ कटघरे में सब बरी काफ़िर
वहाँ कैसी अदालत है चलो देखें
जो छूटा था कहीं पीछे मिला आगे
समय कैसी सियासत है चलो देखें
उसे किसने दिया है ग़म जुदाई का
किसे इतनी सहूलत है चलो देखें
वो काफ़िर है जो लोगों में ख़ुदा देखे
'अधर' अपनी ज़रूरत है चलो देखें
— Prabhat Adhar















