क्या इस बेख़याली का सबब क्या तू है
फिर मेरे ख़यालों में कौन है?
क्या तू है?
ये जो शाम ढली जा रही है
मेरी रातों की चाँदनी क्या तू है ?
दिल अब भी लग नहीं रहा तेरे बिना
सच-सच बता, तेज़ धड़कनों की वज़ह क्या तू है ?
उदास शा
में तो बहुत सी आई
लेक़िन जो आज सयाह उदासी है
इस का सबब क्या तू है ?
— Ashish Anand















