
मैं अपने फूल ले कर किस इलाके में निकल आया
यहाँ के लोग तो तरकश को भी गुलदान कहते है
जो चक्की चल रही है उस के दोनों पाठ उलटे है
जो बे-ईमान है वो हम को बे-ईमान कहते है
— Ashish Anand
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