जो दिल में है वही नासूर हो तुमअकड़ में जाने जानाॅं चूर हो तुमपकड़ के तोड़ देगा दिल तुम्हाराकि जिस के इश्क़ में मग़रूर हो तुमदिलों से खेलती हो तोड़ती होसुना शहरों में यूँॅं मशहूर हो तुम— Krishnavat Ritesh