हम-नशीं दिल की हक़ीक़त क्या कहूँ सोज़ में डूबा हुआ इक साज़ हैहुस्न को नाहक़ पशेमाँ कर दियाऐ जुनूँ ये भी कोई अंदाज़ हैहँस दिए वो मेरे रोने पर मगरउन के हँस देने में भी इक राज़ है— Asrar Ul Haq Majaz