किसी का ग़म उठाना हाँ चुनौती है

किसी को अब हँसाना हाँ चुनौती है

अड़ा है इस सज़ा के सामने सच भी
मगर हरकत बताना हाँ चुनौती है

तू ने बेची हज़ारों ज़िंदगी हो पर
तुझे झूठा फँसाना हाँ चुनौती है

सर-ए-बाज़ार तुझ को मैं झुकाऊँगा
यहाँ तुझ को झुकाना हाँ चुनौती है

नज़र से तो तेरी कोई बचा ही क्या
यहाँ कुछ भी छिपाना हाँ चुनौती है

अना तेरी यहाँ सब को सजा देगी
तेरी आदत हटाना हाँ चुनौती है

बता क्या क्या सभी को बोलना है अब
वहाँ उन को बताना हाँ चुनौती है

बुना है ख़ुद पिटारा साँप का उस ने
नशा उस का मिटाना हाँ चुनौती है

कि तेरे सामने 'आसिफ़' ज़माना है
यहाँ उस को सताना हाँ चुनौती है

— Muhammad Asif Ali

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