आदमी का आदमी से बैर होगाआजकल तो साथ उस के ग़ैर होगाडूब जाओगे मुहब्बत की नदी मेंआशिक़ी में आप का जब पैर होगाख़ुश लगे महबूब तेरा देखने परपूछते सब बोलता मैं ख़ैर होगाबेच कर भगवान को करते गुज़ाराहर गली में इस लिए भी दैर होगा— Aman Vishwakarma 'Avish'