कि सब को भूल जाते हैं मोहब्बत में
सभी का दिल जलाते हैं मोहब्बत में
नहीं है इश्क़ उन को जो किसी से भी
अकेले बुदबुदाते हैं मोहब्बत में
हवा में घोल दूँ जो मैं मोहब्बत को
ज़मीं पे दिल बिछाते हैं मोहब्बत में
अढ़ाई शब्द में उलझे हुए लड़के
बिरह के गीत गाते हैं मोहब्बत में
नहीं है चाँद सूरज तो सितम क्या है
चलो मिल झिलमिलाते हैं मोहब्बत में
दग़ा देंगे वफ़ा देंगे ख़ुदा देंगे
मुक़द्दर आज़माते हैं मोहब्बत में
ज़रा नज़दीक आई फिर मुझे बोली
भला लड़के लजाते हैं मोहब्बत में
— Aman Vishwakarma 'Avish'















